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रक्षाबंधन पर्व की शुभकामनायें – भैया मेरे राखी के बंधन को निभाना, रक्षाबंधन का पवित्र त्यौहार प्रतिवर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाते हैं, बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधने के लिये हर बहन रक्षा बंधन के दिन का इंतजार करती है। श्रावण मास की पूर्णिमा को यह पर्व मनाया जाता है। इसलिए इसे राखी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व भाई-बहन के प्रेम का उत्सव है। इस पर्व को मनाने के पिछे बहुत सी पौराणिक कहानियां हैं।

इस दिन बहनें भाइयों की शुभकामनोँ व् समृद्धि के लिए उनकी कलाई पर रंग-बिरंगी राखियाँ बांधती हैं, वहीं भाई बहनों को उनकी रक्षा का वचन देते हैं। हिन्दू परम्परा में यह त्यौहार एक बड़े पर्व के रूप में जाना जाता है।

 

रक्षाबंधन मुहूर्त –

रक्षाबंधन शुभ मुहूर्त – राखी बांधने का समय 05:54 से 17:59 तकअवधि :12 घंटे ५ मिनटरक्षा
रक्षाबंधन अपराह्न मुहूर्त :13:44 से 16:20 तक

Raksha Bandhan Thread Ceremony Time – 05:54 AM to 05:59 PM
Duration – 12 Hours 05 Mins
Aparahna Time Raksha Bandhan Muhurat – 01:44 PM to 04:20 PM
Duration – 02 Hours 37 Mins

रक्षाबंधन पूजन विधि – इस दिन बहने अपने भाईयों की कलाई पर राखी या रक्षा-सूत्र बांधती हैं और भाईयों की दीर्घायु, समृद्धि व ख़ुशी आदि की कामना करती हैं। राखी या रक्षा सूत्र बांधते हुए इस मंत्र “ॐ येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल” पड़ना चाहिए।

रक्षाबंधन पौराणिक कथा –

एक बार युधिष्ठिर के आग्रह पर भगवान श्री कृष्ण ने रक्षाबंधन की कथा सुनाई भगवान कृष्ण ने कहा- हे पार्थ ! एक बार दैत्यों तथा सुरों में भयंकर युद्ध छिड़ गया और यह युद्ध लगातार 12 वर्षों तक चलता रहा। असुरों ने देवताओं को पराजित करके उनके देवराज इंद्र को भी पराजित कर दिया।

और दैत्यराज ने तीनों लोकों को अपने वश में कर लिया। उसने घोषित कर दिया कि सभी लोग केवल मेरी पूजा ही करें। इसके बाद इंद्र ने देवताओं के गुरु बृहस्पति से सलाह मांगी। बृहस्पति ने इन्हें मंत्रोच्चारण के साथ रक्षा विधान करने को कहा। श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन गुरू बृहस्पति ने रक्षा विधान संस्कार आरंभ किया। इस रक्षा विधान के दौरान मंत्रोच्चारण से रक्षा पोटली को मजबूत किया गया। पूजा के बाद इस पोटली को देवराज इंद्र की पत्नी शचि जिन्हें इंद्राणी भी कहा जाता है ने इस रक्षा पोटली के देवराज इंद्र के दाहिने हाथ पर बांधा। इसकी ताकत से ही देवराज इंद्र असुरों को हराने और अपना खोया राज्य वापस पाने में कामयाब हुए।

आप सभी को गुरुकुल ऑफ़ एस्ट्रोलॉजी साइंस की ओर से रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएँ!
Happy Rakshabandhan

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